क़ुल्फ़ी और आम की आइसक्रीम की अमेरिका में दस्तक
क़ुल्फ़ी और आम की आइसक्रीम की अमेरिका में दस्तक
ठंडे देशों में पूरे साल आइसक्रीम खायी जाती है . आप यह भी कह सकते हैं कि पाश्चात्य देशों में हर मौसम में आइसक्रीम भोजन के बाद खाए जाने वाले मीठे का हिस्सा रहती है . लेकिन भारत में आइसक्रीम के जो स्वाद मिलते हैं वे अब से कुछ साल पहले तक अमेरिका में अधिकांश लोगों को पता नहीं थे .
कुछ ही वर्ष पूर्व मेगा स्टोर चेन COSTCO ने अमेरिका में भारतियों की पहली पसंद मलाई क़ुल्फ़ी और पिश्ता क़ुल्फ़ी बेचने की शुरुआत की थी , जिससे क़ुल्फ़ी भी आइसक्रीम के मुक़ाबले में आ गयी . COSTCO की देखा-दाखी भारतीय मूल के लघु उद्दयमियों ने भी क़ुल्फ़ी बनानी शुरू कर दी है कल मैंने अपने मित्र दोषी जी के साथ सम्मामिश फ़ार्मर मार्केट में बांसुरी ब्रांड की मलाई क़ुल्फ़ी खाई , स्वाद और ठंडक में भारतीय क़ुल्फ़ियों के काफ़ी क़रीब लगी , स्टाल पर लम्बी क़तार लगी हुई थी .
लेकिन अब कुछ उद्दयमियों ने आइसक्रीम में भी भारतीय फ़्लेवर के प्रयोग करने शुरू कर किए हैं उनमें से प्रमुख फ़िलाडेल्फ़िया की कम्पनी फ़्रुटेरो है . इसके स्वामी माइक और वेदांत साबू हैं . वेदांत का बचपन तो भारत में आम , पाइनऐपल जैसे फलों की आइसक्रीम खाते हुए बीता था , उसका मित्र माइक 2019 में भारत गया वहाँ उसने वेदांत के कहने पर फलों से बनी कई आइसक्रीम खाईं जो उसे बहुत ही पसंद आईं . वापस आ कर दोनों ने फ़्रुटेरो कम्पनी की स्थापना की जो ट्रोपिकल फलों की आइसक्रीम बनाती है .
जल्दी ही माइक और वेदांत को पता लग गया कि ट्रोपिकल फल के चाहने वाले केवल भारतीय ही नहीं हैं बल्कि दक्षिण पूर्व एशिया और लैटिन अमेरिकी देशों के लोग भी हैं . उन को यह भी पता लगा क़ि अमेरिका में ऐसे भी लाखों लोग हैं जिन्होंने कभी ट्रोपिकल फल नहीं खाए होंगे .
फ़्रुटेरो ने आइसक्रीम बनाने के लिए दुनिया भर से ट्रोपिकल फल मंगाने शुरू किए , उनके आम कोलम्बिया से , अमरूद ब्राज़ील से , पैशन फ़्रूट पेरागुए, उत्तरी अर्जेंटीना से , नारियल थाइलैंड , शरीफ़े के परिवार का फल गुनाबाना सेंट्रल अमेरिका से आते हैं.
तीन साल में ही फ़्रुटेरो के इन नए नवेले स्वाद के चाहने वालों की तादाद बढ़ी है और इसका राज भारत में बनने वाली फ़्रूट आइसक्रीम हैं
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