Hindi Ghazal : Chahat। चाहत
मेरी चाहत में ही कुछ कमी रह गयी होगी
वरना कोई शख़्स इस तरह बेवफ़ा नहीं होता
सजा मिल चुकी है मुझे उस से दूर जाने की
उसका कोई फ़ैसला यूँ ही बेवजह नहीं होता
जब किसी के क़रीब इस कदर हो जाओ तुम
वहाँ से वापसी का कोई रस्ता बचा नहीं होता
रूठना , रूठ के कुछ पल अपने में सिमट जाना
तुम ही बोलो मोहब्बत में यह कहाँ नहीं होता
दिन गुजर जाए किसी तरहा रात आँखों में कटे
अजीब शै है जुदाई भी जहां कुछ अपना नहीं होता
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