किसको फ़ुरसत है Hindi Poetry
किस को फ़ुरसत है
किसको फ़ुरसत है जो मेरे ज़ख्मों की जरा बात करें
खो दिए इस दौर में मेरे अपनों की जरा बात करें
सच ये है कि वो सपने हमें भरमाने को दिखाए थे
नए देखने से पहले उन सपनों की ज़रा बात करें
जिसकी वाणी में हमारा दर्द बहता दिखाई देता था
खोखले होते हुए उनके शब्दों की ज़रा बात करें
टूटता जा रहा है जिनसे परिवार का ताना बाना
कुछ अगर वक्त हो तो उन रस्मों की ज़रा बात करें
तोड़ने के लिए खाई थीं यह साफ़ कह दिया उसने
वक्त अब आ गया है उन क़समों की ज़रा बात करें
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