सच बोलना शुरू कर दिया है . Hindi Poetry
इन दिनों मैं ज़रा सच बोलना सीख रहा हूँ
इस वजह आप नाराज़ हैं ,ये देख रहा हूँ
कितनी दूर चले आए रिश्ते निभाते निभाते
ये अलग बात है इन्हें लहू से सींच रहा हूँ
किस कदर का शोर है कुछ सुनाई नहीं देता
अपनी फ़ितरत है मैं बात अपनी कह रहा हूँ
मुझको लगता था हार जाऊँगा जंग अपनी
आप मेरे पीछे आ गए हैं मैं अब जीत रहा हूँ
ख़ौफ़ इतना सता रहा मेरे मन को अब तो
घनी बस्ती है बस अपने पदचाप सुन रहा हूँ
Comments
Post a Comment