Hindi Poetry : मैं अदब हूँ तिरा आइना हूँ .........

मैं अदब हूँ 

मैं अदब हूँ 

तिरा आइना हूँ 

जो घट रहा है 

वो सब देखता हूँ . 

नहीं कान मेरे 

जो दे कुछ सुनाई 

न दुखियों के क्रंदन 

न भूखे की आह .

न मैं सुन सकूँ 

बेबसी के चर्चे 

किस तरह चल रहे 

आज लोगों के खर्चे 

न मुफ़लिस की पीड़ा 

न मासूम चीखें 

भले सुन सकूँ न 

मुझे साफ़ दीखें 

मैं  सजग हूँ 

भले आइना हूँ 

जो घट रहा है 

वो सब सोचता हूँ . 

अगर आदमी हो 

हाथ सीने पे रक्खो

न महसूस हो 

तो आइना बन के देखो . 

          - प्रदीप गुप्ता 



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