Rahul Boyal’s Book of Hindi Poetry
कविता संकलन - मैं चाबियों से नहीं खुलता :राहुल बोयल
Locked down में पढ़ने का सिलसिला जारी है , आज एक बिल्कुल नये कवि राहुल बोयल की किताब.
राजस्थान के झुनझुनू के नामचीन गाँव जय पहाड़ी के राहुल हिंदी कविता के सशक्त हस्ताक्षर हैं . पर गुमनाम इस लिए हैं कि वे किसी साहित्यिक ख़ेमे के सदस्य नहीं , न ही उन्हें आगे बढ़ाने वाला कोई सरपरस्त मिला है , राजस्थान के राजस्व विभाग में नौकरी करते हैं , इतना पैसा भी नहीं कि पीआर करके टीवी, रेडियो या समाचार पत्रों में छा जायें. पर सच्ची कविता उस पहाड़ी नदी की तरह से है जो अपनी राह खुद बना लेती है, राहुल की भी धीरे धीरे बना रही है .
राहुल आमतौर पर आक्रोश, दर्द और प्रेम से भरी कविताएँ करते हैं। उनकी कविताओं की ख़ासियत यही है कि वो प्रेम को एक विशिष्ट स्थान पर रखते हुए कविता में आक्रोश को ज़िन्दा करते हैं।
उनकी नई किताब ‘मैं चाबियों से नहीं खुलता’ आज एक ही साँस में पढ़ गया. इस किताब की तीन रचनाएँ
साझी कर रहा हूँ . मैं राहुल के बारे में इतना ही कहूँगा की उनकी कविताएँ आदमी को आदमी होने का सलीका सिखाती हैं




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